आज एक बार फिर मैं पैरों की देखभाल और गिरने से बचने के बारे में लिख रहा हूं। मैंने इस विषय पर पहले भी कई बार लिखा है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह इतना महत्वपूर्ण हो जाता है कि इसे बार-बार याद दिलाना जरूरी है। आखिरकार, एक छोटी सी चूक हमें लंबे समय के लिए बिस्तर पर पहुंचा सकती है।
आजकल हमारे वाट्सएप समूहों में भी ऐसे अनेक वीडियो और संदेश आते रहते हैं, जिनमें बुजुर्गों को चलते समय, सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय और खासकर बाथरूम का उपयोग करते समय बेहद सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
कई बार इसका कारण कोई बड़ी गलती नहीं होती। बस थोड़ा सा अति-आत्मविश्वास, चलते समय ध्यान का कहीं और होना या यह सोचना कि “मैं तो रोज यहां से चलता हूं, मुझे क्या होगा?” और फिर वही होता है जिसका हमें डर भी नहीं था।
मेरे कुछ बहुत करीबी मित्रों के उदाहरण हमारे सामने हैं।
एक मित्र अपने ही बेडरूम से लगे बाथरूम में जा रहे थे। बाथरूम के दरवाजे पर एक छोटी सी चटाई रखी थी। पैर उस पर पड़ा, पैर उलझा और वे गिर गए। हम दिन में कई बार अपने बाथरूम का इस्तेमाल करते हैं और हमें लगता है कि हम उस जगह से पूरी तरह परिचित हैं। लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि उम्र बढ़ने के साथ हम पहले की तरह पैर ऊपर नहीं उठा पाते। हमारी चाल में थोड़ा बदलाव आता है और यही छोटी सी बात कभी-कभी बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है।
एक दूसरे मित्र अपनी पत्नी को किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए अस्पताल ले जा रहे थे। पत्नी को कार में बैठाने में उनकी मदद करते समय उनका अपना पैर सड़क की असमतल सतह पर पड़ा और वे गिर गए। सड़क और फुटपाथ हमारे लिए रोजमर्रा की जरूरत हैं, लेकिन उनकी असमान सतह, गड्ढे, टूटे हुए हिस्से या अचानक ऊंचा-नीचा होना हमारे लिए खतरा बन सकते हैं। उम्र बढ़ने पर हमें इन चीजों के प्रति पहले से अधिक सजग रहना होगा।
एक और मित्र की घटना तो और भी सीख देने वाली है। उन्होंने अपने पति को गिरते हुए देखा और तुरंत उनकी मदद करने के लिए दौड़ीं। जल्दबाजी में उनका अपना संतुलन बिगड़ा और वे भी गिर गईं। उनके कंधे में हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया। कई सप्ताह तक हाथ स्लिंग में रहा और दर्द लंबे समय तक बना रहा।
ये कोई असाधारण घटनाएं नहीं हैं। हममें से लगभग हर व्यक्ति ऐसे कई उदाहरण अपने परिवार, रिश्तेदारों या मित्रों के बीच देख चुका होगा। दुखद बात यह है कि इन घटनाओं को सुनने के बाद भी कभी-कभी हम स्वयं उसी गलती को दोहरा देते हैं और दूसरों के लिए एक उदाहरण बन जाते हैं।
तो आखिर हम क्या कर सकते हैं?
सबसे पहली बात, चलते समय हमारा पूरा ध्यान चलने पर होना चाहिए। मोबाइल फोन देखते हुए, संदेश पढ़ते हुए या बातचीत में इतना खोकर नहीं चलना चाहिए कि सामने का रास्ता ही दिखाई न दे। मोबाइल कुछ मिनट बाद भी देखा जा सकता है, लेकिन गिरने के बाद होने वाली परेशानी कई सप्ताह या कई महीने चल सकती है।
- जहां संभव हो, असमतल सड़क और टूटे-फूटे फुटपाथ से बचें। सुबह की सैर के लिए पार्क या ऐसी जगह चुनें जहां रास्ता समतल और सुरक्षित हो। तेज चलने से ज्यादा महत्वपूर्ण सुरक्षित चलना है।
- बाथरूम पर विशेष ध्यान दें। फिसलन वाली सतह, ढीली चटाई, अनावश्यक सामान या खराब रोशनी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बाथरूम में पकड़ने के लिए हैंडल लगवाएं और फर्श को सूखा रखें। विषेश ध्यान दें कि कपड़े बाथरूप के बाहर आकर बहुत संभल कर पहने।
- जरूरत पड़ने पर छड़ी या किसी साथी की मदद लेने में बिल्कुल संकोच न करें। छड़ी का इस्तेमाल कमजोरी का संकेत नहीं है। बल्कि समय पर सहारा लेना समझदारी है।
- एक और महत्वपूर्ण बात है — अति-आत्मविश्वास से बचें। हममें से बहुत से लोग कहते हैं, “मैं तो अभी बिल्कुल ठीक हूं, मुझे किसी सहारे की जरूरत नहीं।” हो सकता है आप बिल्कुल ठीक हों, लेकिन उम्र के साथ हमारा संतुलन, प्रतिक्रिया की गति और शरीर पर नियंत्रण पहले जैसा नहीं रहता। इसे स्वीकार करना जरूरी है।
- मानसिक रूप से सक्रिय रहना भी मददगार हो सकता है। पहेलियां हल करना, मानसिक खेल खेलना, पढ़ना और ऐसी गतिविधियां करना जिनमें ध्यान और एकाग्रता की जरूरत हो, हमारे दिमाग को सक्रिय रखने में सहायक हो सकता है। शरीर और दिमाग दोनों को सक्रिय रखना हमारी दूसरी पारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
और अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात — गिरने से बचना केवल बुजुर्ग की जिम्मेदारी नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। घर में रहने वाले सभी लोगों को यह देखना चाहिए कि रास्ते में अनावश्यक सामान न हो, कालीन या चटाइयां फिसलने वाली न हों, रोशनी पर्याप्त हो और बाथरूम सुरक्षित हो।
हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि उम्र बढ़ने के साथ हमारी सक्रियता कम न हो। हमें चलते रहना है, घूमना है, लोगों से मिलना है और अपनी पसंद के काम करते रहना है। लेकिन इसके लिए अपने पैरों और अपने संतुलन की सुरक्षा को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
याद रखिए — एक छोटी सी सावधानी हमें लंबे समय तक सक्रिय रख सकती है, जबकि एक छोटी सी लापरवाही हमारी पूरी दिनचर्या बदल सकती है।
This article in English posted on website: The link is
https://neversayretired.in/a-small-carelessness-can-cause-big-trouble/
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